माँ को त्यौहार बना डाला


May 14, 2017 | poems-general

माँ को त्यौहार बना डाला

माँ को प्यार किया न किया
माँ को त्यौहार बना डाला ,
दुनिया में लाने वाले को,
दुनिया ने व्यापार बना डाला ||

जिसने जितना गिफ्ट दिया
औकात बढ़ी उतनी ज्यादा |
जिसने आँख में डाली दवाई,
उसे मिला न कोई फायदा |

बिल्डिंग, बैलेंस जहाँ मिला,
अब वहीँ पर सारा जहाँ है |
अब पिक्चरों में भी कोई नहीं कहता,
कि मेरे पास माँ है ||

पहले हिस्से बंटते थे तो
बंटती थी माँ भी |
अब इस छीना झपटी के ज़माने में,
खतरे में पड़ी है जाँ भी ||

खैर जी, बचपन, षट को, संत को
सबको बराबर ही आता है याद,
माँ की झाड़, माँ का लाड़ ,
कुछ ज्यादा ही कचोटता है माँ के जाने के बाद ||

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