मेरे पहले मित्र


मेरे पहले मित्र

प्रिय के. सी. अग्रवाल,

तुम पहले थे मेरे मित्र, आज भी तुम पहले ही रहोगे,
अपनी सांसे थमने तक, याद में भी पहले ही रहोगे ||
विजय भवन ए की वो डोर्मट्री, मैट्रन ने मिलवाया था,
कहा था अच्छे बच्चे हो तुम, फिर हमने हाथ मिलाया था ||
अब तक बन्धु, मेरे लिए, अच्छे बच्चे के मानक तुम ही हो,
जनम दिवस पर ख़ुशी मनाना, मन से बालक तुम जो हो ||

हैप्पी बर्थडे
सुनील जी गर्ग

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