अनिमेष-अदिति रोका


April 23, 2017 | poems-wishes

अनिमेष-अदिति रोका

अनिमेष अदिति जुड़कर आज

करते सबकी पूरी मुराद

शुरू से लेकर आज तलक तक
सारी घड़ियाँँ आती याद

याद मुझे है जनम तुम्हारा

खुशहाल थी वो अवध की शाम

याद तुम्हारा पहला खिलौना

याद तुम्हारी हर मुस्कान

आँख के तारे रहे सदा से

घर की थे पहली संतान

पालने में दिखा भविष्य

घूमोगे तुम सारा जहान

बचपन पाया तुमने अनोखा

सबने छिड़की तुमपे जान

हर इक जन को तूुुम थे जोड़ते

कार्य ये तुमने किया महान

केशव से कहलाये केशू

रंजन से पहले अनिमेष

आज पूरे परिवार में

नाम तुम्हारा है विशेष

फिर शिक्षा दीक्षा हुई तुम्हारी

काम मिला मनचाहा

मनचाहा अब जीवनसाथी

पा गए तुम तो वाह वाह

ऐसी विशेष हस्ती को तुम्हारी

अति विशिष्ट मिलीं अदिति

अद्बुत संगम बना दीखता

रिश्तों की ये सही परिणीति

जीवन के हर मोड़ पे तुमने

रिश्तों के मूल्य रखे बनाये

आज तभी तो इस अवसर पर

शुभाशीष देने सब हैं आये।

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