काल के कपाल में     


Poems : Tributes17-Aug-2018


अटल जी की कविताओं के कुछ शब्द लेकर ये श्रद्धा सुमन मेरी तरफ से अर्पित हैं

काल के कपाल में, देश का एक लाल
क्यों ऐसे सो रहा है, देश रो रहा है

बनती थी सबसे, पर मौत से ठनी थी
शायद तभी सो रहा है, देश रो रहा है

गीत नया गाता था, सबको सुनाता था
चुप आज सो रहा है, देश रो रहा है

टूटे हुए सपनों की, सुनने को सिसकियाँ
मौन आज सो रहा है, देश रो रहा है

हार नहीं मानूँगा कहता, रार आज ठान ली
कूच करके सो रहा है, देश रो रहा है

शीशे के शहर में, मीत न उसको मिला
इसीलिए वो सो रहा है, देश रो रहा है

सुनील जी गर्ग

(Written after seeing Late Shri Atal Bihari Vajpayee in a glass box, as he rode to heavenly abode on 16th Aug. 2018)

 

 

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