नववर्ष 2017     


Poems : Special days01-Jan-2017


इस साल की कविता कुछ यूं है

ये नया साल बदलेगा भारत की तस्वीर
इसी साल बदलेगी हम सबकी तकदीर
आप बस वादा करें कि करेंगे तदबीर
नया साल फिर मनाएंगे जब उड़ेगी अबीर
अब देश में रहा न गरीब न अमीर
क्योंकि कुछ फैसलों ने मिटा दी लकीर
बात तब ही बनेगी जब जिन्दा रहे ज़मीर

नूतन वर्ष मंगलमय हो

सुनील जी गर्ग

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