वो और थे     


Poems : Shayari22-Jul-2019


काहे देते फिरते हो गालियाँ सबको,
वो और थे जो मानते थे बुरा
वक़्त ने मोटी कर दी है चमड़ी इतनी
होने वाला कुछ नहीं चाहे मार दो छुरा

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