ढक्कन     


Poems : Shayari23-Jul-2019


यूँ ही ढक्कन समझ कर छोड़ा न करो उनको
सही चूड़ी चढ़ाओगे तो आएंगे काम,
छलक जाएंगी भरी बोतलें इनके बिना
ख़ास मकसद होता है उनका भी जो होते हैं आम ।

Tags:

Leave a Reply

avatar
  Subscribe  
Notify of
|