कल हमारा आया तो अगर     


Poems : Self Flows21-Feb-2020


इतना ज़्यादा कर दिया भगवान भगवान
पता नहीं किसको मानूँ , किसको न सकूँ मान |
और कितनी लोगे अरे भाइयों मेरी जान,
सोच पर ताले डालोगे, हूँ मैं अदना सा इन्सान ||

भक्तों और अपराधियों में कम है इतना फरक,
भगवान के नाम पर धरती को बनाया है नरक |
खून से रंगे हाथ प्रतिमाओं पर चढ़ाएंगे अरक |
आस्था के दरख़्त तभी तो गए हैं दरक ||

क्या लिखूं क्या बोलूं, गुस्सा भी गया है सूख,
भगवान होता तो सबसे पहले मिटाता वो भूख |
दरअसल भगवान जरिया बना गया है दिखाने का रसूख,
गुंडों को बनाया राजा, प्रजा से हो गयी है चूक ||

कुछ ढाँचा बनेगा, इक बुत भी रखवाया जाएगा,
किसी का दिल निकालकर किसी को लगाया जाएगा |
मगर उस चौखट पर कोई आशिक़ न जाएगा ,
क़ौम की दोस्ती का जहां से ज़नाज़ा उठाया जाएगा ||

हम जिसको मानते थे कहते थे राम,
जिसका नाम लेकर करते थे दुआ सलाम |
हम करते थे, तब भी कहते थे करता वही है काम,
उसे खुद न पता होगा उसका ये होगा अंजाम ||

क्या कहें कोई मुसीबत भी नहीं आती जो मिला दे दिलों को,
बड़ी मजबूत हो चुकी हैं दीवारें, कैसे ढायें किलों को |
दिमाग और जुबां सब है बंद, कौन समझाये अगलों को,
अब कुछ हल होता नहीं क्या ताक़ीद करें सिलों को |

लिखने की हिम्मत भी रही है टूट, लगता रहता है डर,
अब तो किसी की कलम भी नहीं है अमर और अजर |
जहन में हूक उठती रहेगी, करतूतों पर पड़ती रहेगी नजर,
धोखे से तुम्हारा वक़्त आया है, कल हमारा आया तो अगर |

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