तुम उसी ज़मीन पर खड़े हुए,
जहाँ घर से पहला गया था विदेश |
अब तुमको नाम है रौशन करना,
विद्या पाना तुम सबसे विशेष ||
दुनिया में घूम घूम कर सीखो,
कैसे हैं लोग कैसी दुनियादारी |
असली विज्ञान तो मन का होता,
कर लो इसे पढ़ने की तैयारी ||
इतना खुश रहते रहो सदा,
जो पास हो खड़ा हो जाए खुश |
खोजते खोजते यही है मिलता,
हर्ष भीतर ही छिपा है मेरे मानुष ||
तुम्हारे जन्मदिवस पर हर साल,
हो जाता हूँ दार्शनिक जैसा |
बधाई देता हूँ थोड़ी सी,
विचार ठेलता हूँ अधिक सा ||
बस काफी हो गया
जन्मदिन उत्साह दे, मंजिलों की पहचान दे
ऐसी कामना है
पापा
Leave a Reply