इतिहास सब कुछ कर लेता है नोट     


Poems : Self Flows21-May-2020


कल न्यूज़ देखकर कुछ लिख डाला, सोचा आप सबसे शेयर करूं

फैलता जा रहा है, फैलता जा रहा है
मैं वायरस नहीं, रायते की कर रहा हूँ बात
तेज हो रही है, रफ़्तार तेज़ हो रही है
मैं तूफ़ान की नहीं, बता रहा हूँ राजनैतिक हालात।।

जैसी हुई यहाँ पर बसों पर लड़ाई
कल शायद वैक्सीन बांटने पर होगी
इस देश को अभी देखना है बहुत कुछ
महाभारत तो एक कलियुग में भी होगी

कृष्ण और अर्जुन न होंगे पर होगा ढोंग
टेक्नोलॉजी के नाम पर भरेंगे दम सब
असलियत तो सूक्ष्म विषाणु ने दिखा दी
आइना देखने पर भी सुधरे हैं हम कब ।

पर याद रखना कल गाँव से फिर पड़ेगा जुड़ना
वो जो लिखा है ‘हम भारत के लोग’ वहीँ बसेंगे
कितनी भी कर लो बहस, बदल लो संविधान
खाना वहीँ उगेगा, उन पर ही हम निर्भर रहेँगे

लौटते क़दमों का हिसाब शायद भूल जाएँ वो
बदले की भावना नहीं, इसी का हमने लिया फायदा
मगर इतिहास सब कुछ कर लेता है नोट
बतला देगा किसका था कायदा, किसका बेकायदा

सुनील जी गर्ग

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