मेरे पिता और मैं पिता (एक परिवर्तन)     


Poems : Self Flows21-Jun-2020


मेरे लिए आप एक दिवस नहीं
बस पूरे हर दिन हर साल थे
मालूम न था इतनी जल्दी जाओगे
आप गए तो अपने बुरे हाल थे

फिर संभले, ख़ुद भी बने बाप
फादर का दिन मनाने लगे बच्चे
एक दिन ही मिलने लगा हमको
रिश्ते क्यों पड़ते हैं अब थोड़े कच्चे

वो जो आप किया करते थे
हम भी तो कुछ वैसा ही करते हैं
ये दिन मनाने की अजब चली बयार
आज बच्चे नहीं, पिता बच्चों से डरते हैं

आपकी, अम्मा की तस्वीर लगी है
रोज बिना नागा नमन कर लेता हूँ
अपनी तो दीवार पर नहीं लगेगी
इंटरनेट पर रहेगी, सब्र कर लेता हूँ

पर हाँ एक बात है, बतला देता हूँ
आप आज के दिन कुछ ज़्यादा आते हो याद
बुरी नहीं ये पितृ दिवस की प्रथा
आज शायद मेरे बच्चे देंगे मेरी कविताओं को दाद

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