जाने किस बात की टीस     


Poems : Self Flows23-Jun-2020


मोर्चे कई खोलने पड़ते जब, विचारों की लड़ाई हो विचारों से
रिश्तों में क्या देखें जीत क्या देखें हार, इन झूठे सच्चे यारों से

नया सोचना होता है, विचारों की भी एक टीम बनानी होती है
इनका का भी एक व्यापार सा होता है, कमाई दिखानी होती है

लम्बी चला करती हैं ऐसी लड़ाइयां, कई पुश्तें लग जाती हैं
हारने की आदत भी होती है सीखनी, जीतें तभी सुहाती हैं

हर कोई सोचता तो है, बस हमसे सिरफिरे लिखते हैं इन बातों को
अब कागज पे नहीं उकेरते, कीबोर्ड पर ठक ठक करते हैं रातों को

मेरे लिए ये बातें हैं गंभीर, आपके लिए कैसी होंगी पता नहीं
कुछ बातें निकली हैं दिल से, कुछ नहीं, वैसे मेरी कोई खता नहीं

हम बेहतर हैं उनसे, हम सोचते हैं, वो भी तो यही सोचते होंगे
रिश्ता आगे चलायें या न चलायें, वो भी तो जरूर तौलते होंगे

बस यूं ही दिल की टीस किसी को न दिखाने की है आदत
आजकल बदला सा है माहौल, बदल गया है लफ्ज़-ए-चाहत

– सुनील जी गर्ग

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