सलिल आभा रजत वर्ष की बधाई     


Poems : Wishes08-May-2014


लिखता हूँ मन से, इसे बेमन न समझना ,

याद रखता हूँ पुरानी बातें, बेशरम न समझना |

तुम्हारी शादी में मौजूद था मैं भी, भूला ना हूँ दस्तूर,

सलिल, आभा डिस्टर्ब ना हों आज रात, कल बधाई करें मंजूर ||

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