इप्शिता-सुनील के विवाह की काव्य रिपोर्ट

25-Feb-2019

मेरी तरफ से धन्यवाद के रूप में प्रस्तुत है ये रचना –

इक वो जगह थी बड़ी अनोखी,
जहाँ मिले इप्शिता, सुनील।
मधुर बने, रसोगुल्ले जैसे,
रिश्ते हुए और हसीन ||

रिश्ते हुए और हसीन,
नवाज़िश थे अशु असीम |
मकरंद, वंदना हाज़िर थे सदा,
अनाहिता ने बनाई थी थीम ||

गाकर सजीली महफिल में,
मिहिका ने लगाए चार चाँद |
लगा ज़मीं पर उतरे सितारे,
जब नाना-नानी का हुआ डांस ||

दादा, दादी का मिला आशीष,
दादा की कविता उपयुक्त थी |
फैमिली थी बड़ी, दोस्त थे अनेक,
पूरी टोली ये चुस्त थी ||

संगीत संध्या थी मार्के की,
घर वाले बने बिलकुल प्रोफेशनल |
दूल्हा, दुल्हन नाचे और बोले तो
माहौल हुआ बिलकुल इमोशनल ||

सुन्दर थी हर रस्म बड़ी,
मेंहदी, हल्दी, गौर, जयमाल |
मोटरसाइकिल पर आकर दूल्हे ने,
मचा दिया टोटल धमाल ||

जब विदाई की आयी बेला,
आँखों में नम मुस्कान थी |
अलग आभा थी, संजीदगी थी,
इस जोड़े की अब अलग पहचान थी ||

अब क्या बोलें ज्यादा,
सबको यथायोग्य लिखते हैं |
ऐसे समारोह से परिवार में,
और मज़बूत, सम्बन्ध उभरते हैं.||

– सुनील जी गर्ग

(Written to share my experience of marriage of Ashu-Aseem’s Daughter Ipshita with Sunil of Kolkata)

अनिमेष अदिति के विवाह पर

06-Dec-2017

बड़े ख़ास ये दूल्हा दुल्हन, कोई न इनका सानी,
सम्राट अनिमेष, महारानी अदिति, नए ये राजा रानी |

नए ये राजा रानी, करेंगे सबके दिल पर राज,
खुशियाँ ऐसी सदा ही बरसें, जैसी बरसीं आज |

युगल ये भ्रमण करेगा दुनिया, ऐसा है अंदाज़,
दूल्हा ये पक्का उठा सकेगा, दुल्हनिया के नाज़ |

आशीर्वाद बड़ों का इन पर, बच्चों का है प्यार,
मित्रों की भी शुभकामनाएं जाती सब पर वार |

जाना आप विदेश, मगर ये रखना यादें,
सबको जाकर खूब बताना, अपने वतन की बातें |

अपने वतन की बातें, है खुशबू इसकी निराली,
उचंग से पूरी आप मनाना, होली और दीवाली |

मैया, बाबा, भ्राता, बहिना, रिश्ते और अनेक,
आसानी से निभ जायेंगे, बस दिल से रहिये नेक|

अनिमेष-अदिति रोका

23-Apr-2017

अनिमेष अदिति जुड़कर आज
करते सबकी पूरी मुराद
शुरू से लेकर आज तलक तक
सारी घड़ियाँँ आती याद

याद मुझे है जनम तुम्हारा
खुशहाल थी वो अवध की शाम
याद तुम्हारा पहला खिलौना
याद तुम्हारी हर मुस्कान

आँख के तारे रहे सदा से
घर की थे पहली संतान
पालने में दिखा भविष्य
घूमोगे तुम सारा जहान

बचपन पाया तुमने अनोखा
सबने छिड़की तुमपे जान
हर इक जन को तूुुम थे जोड़ते
कार्य ये तुमने किया महान

केशव से कहलाये केशू
रंजन से पहले अनिमेष
आज पूरे परिवार में
नाम तुम्हारा है विशेष

फिर शिक्षा दीक्षा हुई तुम्हारी
काम मिला मनचाहा
मनचाहा अब जीवनसाथी
पा गए तुम तो वाह वाह

ऐसी विशेष हस्ती को तुम्हारी
अति विशिष्ट मिलीं अदिति
अद्बुत संगम बना दीखता
रिश्तों की ये सही परिणीति

जीवन के हर मोड़ पे तुमने
रिश्तों के मूल्य रखे बनाये
आज तभी तो इस अवसर पर
शुभाशीष देने सब हैं आये।