जाने किस बात की टीस

June 23, 2020

मोर्चे कई खोलने पड़ते जब, विचारों की लड़ाई हो विचारों से रिश्तों में क्या देखें जीत क्या देखें हार, इन झूठे सच्चे यारों से नया सोचना होता है, विचारों की भी एक टीम बनानी होती है इनका का भी एक व्यापार सा होता है, कमाई दिखानी होती है लम्बी चला करती हैं ऐसी लड़ाइयां, कई […]

मेरे पिता और मैं पिता (एक परिवर्तन)

June 21, 2020

मेरे लिए आप एक दिवस नहीं बस पूरे हर दिन हर साल थे मालूम न था इतनी जल्दी जाओगे आप गए तो अपने बुरे हाल थे फिर संभले, ख़ुद भी बने बाप फादर का दिन मनाने लगे बच्चे एक दिन ही मिलने लगा हमको रिश्ते क्यों पड़ते हैं अब थोड़े कच्चे वो जो आप किया […]

अपनी ही बुलेट बनानी होगी

June 18, 2020

अब खून नहीं खौलता किसी का, आदत अपनी है सुविधाभोगी सीमा पर जाबाँज गँवाकर बात करें, ज्यों पहुंचे जोगी वो कवि प्रदीप अब नहीं रहे ऐ मेरे वतन जो लिख के गए दिनकर को अब ढूंढो मत जो समर शेष बतला के गए लता दीदी जब बच्ची थीं जब पी.एम्. की आँखें हुईं नम आज […]

बेअसर कमेरे, बेहतर कवि

June 1, 2020

कवि को बस तारीफ चाहिए आधा सच ये आधा झूठ कोई कमेंट न मिलता उसको इतनी जल्दी जाए न रूठ कविता क्या बस तुकबंदी है भाव वगैरह समझ है अपनी सबके दायरे अपने अपने सबको अपनी माला जपनी हाँ पर हिलते कभी दिलों के तार किसी के शब्दों से पत्थर दिल जाते हैं पिघल गरम खौलते कुछ […]

सब ख्याल रखना

May 31, 2020

खा खा कर अब बोर हो गए घर का समोसा, इडली, डोसा खस्ता कचौरी मिली न कबसे मुए कोरोना को रोज ही कोसा कमर नहीं थी ऐसी लचक की रोज लगा सके झाड़ू पोंछा हाथ बटाएंगे वादा था हाँ रोज की आफत किसने सोचा मीट, टीम, और ज़ूम के रिश्ते कब तक करेंगे हम ये […]

अपने देश में कहलाये प्रवासी

May 21, 2020

राममयी जनता है, जनता में राम हैं देवलोक में लॉकडाऊन, उनको भी आराम है जिनको आराम न था सड़कों पर निकले हैं अपने देश में कहलाये प्रवासी, अजीब नए जुमले हैं

इतिहास सब कुछ कर लेता है नोट

May 21, 2020

कल न्यूज़ देखकर कुछ लिख डाला, सोचा आप सबसे शेयर करूं फैलता जा रहा है, फैलता जा रहा है मैं वायरस नहीं, रायते की कर रहा हूँ बात तेज हो रही है, रफ़्तार तेज़ हो रही है मैं तूफ़ान की नहीं, बता रहा हूँ राजनैतिक हालात।। जैसी हुई यहाँ पर बसों पर लड़ाई कल शायद […]

अरे कुछ दिन जरा रुका

May 16, 2020

ऐतिहासिक श्रमिक निवर्तन पर कुछ पंक्तियाँ एक वार्तालाप के रूप में लिखीं हैं, आशा है आपको कहीं छूएंगी अवश्य | अरे कुछ दिन जरा रुका सब ठीक हो जाईल, फिर कमायेंगे तोहार बात सब ठीक पर भैया हम तो घर जायेंगे । उहाँ का धरा है बंजर ही तो जमीन पड़ी है हम तोहार समुझाइ […]

मुझमें उम्मीद उनसे थोड़ी ज़्यादा है

March 28, 2020

बैटरी पड़ गयी है मंद, सुस्त हो गयी है घड़ी, वैसे भी अब वक़्त अब देखना किसको है | ज़िन्दगी की यही रफ़्तार लगने लगी है अच्छी, कौन मुझसे आगे दौड़ेगा देखना मुझको है || दौड़े दौड़े से भागे से आगे फिरते थे मुझसे वो, मेरा मज़ाक बनाने में मज़ा आता था उनको | आज […]

जनता कर्फ्यू

March 22, 2020

सुबह अलसाये उठे, दोपहर तक देखते रहे टीवी, जिज्ञासा बढ़ी दरवाजे पर आकर हुए खड़े | हाँ आज बदली बदली थीं आवाजें सारी, चहकती थी चिड़ियाँ, पेड़ कुछ थे ज़्यादा तने खड़े || आज आदमी मनाता था नाम रखकर जनता कर्फ्यू, और प्रकृति ने आदमी के शोर से पायी थी निजात | हम चाहते थे […]

कोरो ना आशिकी

March 19, 2020

आजकल जो शब्द चल रहे हैं उनको मिला कर ये रचना बना ली। सावधानियां भी इसमें शामिल हैं। अच्छे लगने लगे उनको वो आशिक़, हाथ धोकर थे जो पीछे पड़े । दरअसल जाने अनजाने वो लोग कोरोना वायरस से बेहतर थे लड़े ।। पीछे पड़ो मगर मीटर की दूरी बना कर रखो, कन्या ने साफ़ […]

कल हमारा आया तो अगर

February 21, 2020

इतना ज़्यादा कर दिया भगवान भगवान पता नहीं किसको मानूँ , किसको न सकूँ मान | और कितनी लोगे अरे भाइयों मेरी जान, सोच पर ताले डालोगे, हूँ मैं अदना सा इन्सान || भक्तों और अपराधियों में कम है इतना फरक, भगवान के नाम पर धरती को बनाया है नरक | खून से रंगे हाथ […]

तुम खुद ही फसोंगे

January 27, 2020

मुझे अब कबीर न आता याद , रुंध गया गला, चुप गयी फरियाद | सुना तो गया था मेरा पूरा वाद, मैं बाहर भी हूँ, मगर न आज़ाद || देता पहले भी न था, अब मांगता भी नहीं, इज़्ज़त की बात करें, इज़ाज़त ही नहीं | चुप रहकर बोलना सीख रहे हैं आजकल, सब चंगा […]

करते करते रब और राम

January 27, 2020

करते करते, रब और राम, हो गए पागल, लोग तमाम | न बना किसी का कोई भी काम, तरक़्क़ी पर लग गया पूर्ण विराम || हम मूरख बनते सुबह ओ शाम, जीते तो हैं पर सांस हराम | डाल नकेल कोई शख्स अनाम, पहुंचाता हमको अंजाम || वो झट से उठा, लगा दिए दाम, हम […]

अब जनम तो लो श्री किशन

January 11, 2020

चाँद पे ग्रहण लगा, ग्रहण लगा था सूर्य पे | राज्य सारा जल रहा, शिकन नहीं हुज़ूर पे || सुना था कोई नीरो था, बजा रहा था बांसुरी | फ़रक कहाँ था पड़ रहा सुरीली हो या बेसुरी || था बात जिनका काम, वो बातें बनाने लगे | ख़बरनवीस यूँ गज़ब, किस्से सुनाने लगे || […]

सपने और उम्मीद

January 11, 2020

सपने और उम्मीद, बस फ़रक थोड़ा सा | ओ मेरे समझदार मन अब आगे बढ़ो न थोड़ा सा || तुलना करते करते लोग, देखते हैं, झूठे सच्चे सपने | उम्मीद करते हैं मेहनतक़श, काम से आगे बढ़े होते हैं अपने || कौन से खाने में हो मेरे यार, ज़रा तुम भी सच सच बताना | […]

क़ातिल से मोहब्बत

January 11, 2020

डरते डरते, वक़्त कुछ यूं आया, काफ़ूर दिल से हुआ सारा डर | हमें क़ातिल से हो गयी मोहब्बत, फ़ूल झरेंगे, जब घुसेगा ख़ंजर || सुना है इंतहा से आगे है, इंतहा की भी इंतहा | दिमाग़ हो दोनों तरफ़, तब तो हो जिरह की इंतहा || जब लाइन लगी थी वहां पर, सब तुम्हें […]

फैसला आया, फासले मिट गए

November 9, 2019

कोई हारा नहीं सभी जीत गए । फैसला आया फासले मिट गए ।। कुछ सुधरे सुधरे से लगे ज़्यादातर नेता । लगता है कलयुग में आया हो युग त्रेता ।। पर रामराज्य अभी कहीं दूर खड़ा है । जाति भेद का दानव अब भी यूँ ही अड़ा है ।। अब हर किसी को पढ़ाना है […]

सरकारी दिवाली

October 27, 2019

लो फिर एक दीवाली आयी खुशियाँ सबने फिर से ओढ़ींं। रस्ते पर जो भटक गए थे रौशनी की तरफ राहें मोड़ींं।। इस बार पटाखे कम चलेंगे, ऐसा है सरकारी आदेश। सरकारें कुछ भटक गयीं हैं, पाने को पूरा जनादेश ।। अब तो लाखों दिए जलाना, सरकारी एक अनुष्ठान है । अब कोई दर्द है नहीँ […]

अलग भाव दीवाली पर

October 27, 2019

लो फिर एक दीवाली आयी खुशियाँ सबने फिर से ओढ़ींं। रस्ते पर जो भटक गए थे रौशनी की तरफ राहें मोड़ींं।। हमको भी आदत थी सदा की, लाइट लगायी, मिठाई लाये । सबसे बड़ा त्यौहार है ये, यही सोच खुद को रहे भरमाये।। पर जाने क्यों इस बार अलग है भाव, बाज़ार तो सजा है […]