नज़दीकियां सारी मैं हूँ


साथ चलती हो तो साथ बैठा भी करो,
साथ साथ रहना लगता है अच्छा ।
साथ रहने से उपजी लड़ाई हुई अब कल की बात,
झूठ अब झूठ न रहा हो चुका है सच्चा ।।

तुम जब उबलती हो तब भी, शांत होती हो तब भी,
लगता है वजह हर अदा की तुम्हारी मैं हूँ ।
वैसे मैं ही हूँ पक्का तुमसे ज़्यादा ड्रामेबाज़ ।
जानेगा न तुमको कोई और क्योंकि नज़दीकियां सारी मैं हूँ ।


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