हम गाँधी के देश हैं


आज गाँधी जयंती पर कुछ लिखने से रोक न सका.
अंत तक पढेंगे तो पूरा भावार्थ पता लगेगा.

जाति, धर्म में बंटे हुए,
लालच में पूरे सने हुए,
वादों, नारों में फंसे हुए,
हम गाँधी के देश हैं |

आदत के हम पूर्ण गुलाम,
राम पे छोड़े सारे काम,
हमको भाता बस आराम,
हम गाँधी के देश हैं |

देते संस्कृति की दुहाई,
समझ न इसको पाते भाई,
पीछे छूटी अपनी पढ़ाई,
हम गाँधी के देश हैं |

सीखा करना हमने जुगाड़,
लेके अपने दिमाग की आड़,
सही तरीका जाये भाड़,
हम गाँधी के देश हैं |

हाँ पर आज भी हस्ती हमारी,
दुनिया जाए वारी – न्यारी,
युवा है जनता, बड़ी ही सारी,
हम गाँधी के देश हैं |

आज भी सच्ची है मुस्कान,
आज भी मन में नहीं थकान,
दिल की लगी न अभी दुकान,
हम गाँधी के देश हैं |

फिर से पढ़ने होंगे ग्रन्थ,
जोड़ के अपने सारे पंथ,
नहीं फिर होगा अपना अंत,
हम गाँधी के देश हैं |

– सुनील जी गर्ग

गाँधी जयंती व् शास्त्री जयंती
की शुभकामनाएं

 

 

 

 

 

 

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