वर्ष शगुन का (For Shivam)


February 28, 2015 | poems-wishes

आज शगुन के वर्ष में बन्धु, किया है तुमने प्रवेश |

खुले नए हैं द्वार सभी अब, जाना देश विदेश ||

जाना देश विदेश , मगर तुम महक बनाये रखना |

मिटटी ही साथ सदा जाती , तुम याद सदा ये रखना   ||

धीरे धीरे सब कुछ मिलेगा , धैर्य जरा तुम रखना  |

मेहनत ही बस सड़क अकेली , मंजिल तक जाती है न  ||

कहीं कहीं रोड़े आयेंगे ,  भाग्य उन्हें तुम मानो |

चलने की पहचान यही है, बस आगे सब तुम जानो ||

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